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Thursday, 3 January 2013

"Avtar Bani"

धन निरंकार जी।।।।

"उच्चा सभ तो है दर तेरा महिमा तेरी अपरम्पार।

गुण  तेरे ने गिणती बाहिरे मेहरां दा नही कोई शुमार।

निस दिन गौन्दै गुण जो तेरे अंग संग तक तैनू दातार।

चरन तेरे जे पत्थर छू लए भवसागर हो जांदै पार।

पाक पवितर होंदै  पापी बणदै मूरख वी हुश्यार।

दासनदास दास हो  रह्न्दै जां बलिहार कहे अवतार।

धन निरंकार जी।।।।

Wednesday, 2 January 2013

"Avta Bani"

धन निरंकार जी।।।

"लोकीं आखण गृहस्त नू छड के जेहडा जंगली जावे सन्त।

सोहणे सोहणे कपड़े लाह के भगवें कपड़े पावे सन्त।

सन्त है ओह जो लाये समाधी धूणी जेहडा रमाये सन्त।

लोकी कहण जो स्वास चढ़ा के बगल-समाधी लाये सन्त।

घर विच रह के घर नू पाणा सन्ता दी वडीयाई ए।

कहे अवतार पूरे मुरशद तों मै एह सोझी पाई ए।"

धन निरंकार जी।।।

Sunday, 23 December 2012

Avtar bani..

धन निरंकार जी।।।

भावें रब ए दाता जेहडा सभना दे नाल रहन्दा ए।

पूरा सतगुरु मिल जाये जेकर ता एह परदा लहन्दा ए।

पल पल याद करो इस रब नू माण दा भांडा चूर करो।

सिमर सिमर के एसे रब नू चिन्ता मन दी दूर करो।

साध चरन ते रख के सिर नू दूर दिलों हंकार करो।

ले अवतार गुरु पग धूड़ी अग्ग दा सागर पार करो।

धन निरंकार जी।।।

Thursday, 20 December 2012

"Avtar Bani"

धन निरंकार जी।।।।

"दूक्खा मारया बन्दा वेखो कूके ते फरयाद करे।

याद ना करदा मालक दी जो पल पल ते इमदाद करे।

नाल फनाह दे प्रीतां लाइयां बाकी दी पहचान नही।

मदमस्ती विच मस्त फिरे पर मौत दा एह्नु ध्यान नही।

एह्दा बन्दा ज्म्म्दा मरदा भोग रिहा ए  कई जन्म।

कहे अवतार जगत नु रख ले कर के अपनी मेहर करम।

धन निरंकार जी।।।।

 

Tuesday, 18 December 2012

"Avtar Bani"

धन निरंकार जी।।।।

"किस घड़ी ए घाड़त एहदी कौन बनावण वाला ए।

आपे आप है सब कुछ आपे हर इक शै तो बाला ए।

कदद ते बुत नहीं एह्दा कोई न गोरा न काला ए।

निरा नशा ए ज़ात खुद ही अजली मय दा प्याला ए।

कहे अवतार गुरु हथ कुंजी एसे दिता ताला ए।

ले कुंजी जो ताला खोले विरला किस्मत वाला ए।

धन निरंकार जी।।।।
 

Monday, 17 December 2012

"Avtar Bani"

धन निरंकार जी।।।।

"कई ज़बानां कर के कठियां उस्तत इसदी गाइये जे।

कवि इक्कठे कर दुनिया दे उपमा एहदी लिखाइये जे।

विद्वाना दे मुंहों कर के महिमा एहदी सुणाइये जे।

विच समुन्दर पा के स्याही घोल दवात बणाइये जे।

फिर भी इस दातार प्रभु दा गीत न गाया जांदा ए।

कहे अवतार इस पारब्रह्म दा अन्त ना पाया जांदा ए।"

धन निरंकार जी।।।।




 

Thursday, 13 December 2012

"Avtar Bani"

धन निरंकार जी।।।

एक डली सोने दी लैके गहने कई बणवा लईये।

मुन्दरी छापा हार ते कांटे मरज़ी दे घडवा लईये।

मुड़ के मुन्दरियां छापा हारा नूं जे कर गलवा लईये।

मुड़ सोने दा सोना हो जाए कितने रूप वटा लईये।

एदां बन्दा हिन्दू मुस्लिम सिख दा भेस बणा बैठा।

कहे अवतार असल विच बन्दा वाधू झगड़े पा बैठा।

धन निरंकार जी।।। 
 

Wednesday, 12 December 2012

"Avtar Bani"

धन निरंकार जी।।।।

" इस जग दा सामान है झूठा अंत नाल नहीं जाणा ए।

साध संग मिल नाम नु जाणो जिस ने पार लंघाणा ए।

बिना नाम ते जनम मरण तो किसे नही बचाणा ए।

 गेड़ चौरासी लख जूनां दा रब दे ज्ञान मुकाणा ए।

ज्ञान गुरु दे बाझो बन्दे अज तक किसे ने पाया नहीं।

कहे अवतार ज्ञान नही मिल्या जद तक गुरु रिझाया नही।"

धन निरंकार जी।

 

Tuesday, 11 December 2012

"Avtar Bani"

धन निरंकार जी।।।

"खेती चाहे किसे दी होवे सूरज कदे चितारे ना।

चन्न सभनां नू दए चानणी रूप करूप विचारे ना।

पाणी सब दी प्यास बुझावे ऊँच नीच एह वेखे ना।

हवा कदे वि माड़ा चंगा छोट्टा वड्डा देखे ना।

पूरा सतगुरु वी जग अन्दर सब नु गले लगान्दा ए।

कहे अवतार जेहो जेहा होवे सभ नु चरनी लान्दा ए।"

धन निरंकार जी।।।


 

Monday, 10 December 2012

"Avtaar Bani"

Dhan Nirankar Ji...

"Usda vi ey guru sahara jisda koi sahara nahi.

Usda vi ey guru gujara jisda kite gujara nahi

Satguru bajo paapi bande nu na koi parvaan kare

Mann di hangta ley ke anginnat ehsaan kare

Kahe avtaar gyaan di bakhsheesh jadd teekar ho jaandi nahi

Jeevan maksad di bande nu samajh kade vi aandi nahi."

Dhan Nirankar Ji...


   

Thursday, 6 December 2012

"Avtar Bani"

धन निरंकार जी।।।

"अज साइंस ते साइंसदानां बड़े बड़े बणाये  बम्ब।

इक्को बम्ब नाल दुनियां मर जाये ऐसे ऐसे आये बम्ब।

समुन्दर ते दरयावां अन्दर बड़े बड़े अजमाये बम्ब।

नाश करन लई  अंश जीव दी कई था उते चलाये बम्ब।

मुरदे नू जो ज़िन्दगी बख्शे मुरशद दवा बणाई ए।

कहे अवतार मै मरदे मरदे इस तो ज़िन्दगी पाई ए।"

धन निरंकार जी।।।

Wednesday, 5 December 2012

"Avtar bani"

धन निरंकार जी।।।।

समय गया फिर हत्थ नही आउणा अंत समय पछताएंगा।

धरमराय ने जम्म जां घल्ले रोयेंगा कुरलाएंगा।

संगी साथी जिन्ने तेरे कम किसे ने आउणा नहीं।

सक्के साक स्बन्धिया चों वि आ के किसे बचाऊणा नहीं।

आखर नु कम गुरु ने आउणा गोरे चिट्टे चम नहीं।

अवतार दे सिख तों  लेखा मंगे धरमराय दा दम नही।

धन निरंकार जी।।।। 

 

Monday, 3 December 2012

"Avtaar Bani"

धन निरंकार जी।।।

"अंग संग जो रब है साडे एहो साडा सक्का ए।

सारे रिश्तेदारा विच्चों एहो रिश्ता पक्का ए।

एहो साडा मस्जिद मन्दर हज काहबा ते मक्का ए।

एहो साडा माल खज़ाना एहो पैसा टक्का ए।

जिन्हा ने रब याद न रख्या खाली ओह विचारे गए।

कहे अवतार ओह पांधी सारे खोज खोज विच मारे गए।"

धन निरंकार जी।।।

Sunday, 2 December 2012

"Avtaar bani"

धन निरंकार जी।।।।

"सतगुरु मैंनू चरनी लाया भरम भुलेखा सब गंवाया।

चिन्ता सब दी हो गई दूर  जिधर वेखां नूरो नूर।

दूक्खा ने मुंह फेर लेआ ए सुक्खा मैंनू घेर लेआ ए।

नहीं कोई दिसदा होर किनारा केवल तेरा इक सहारा।

मेहरबान जो सतगुर तुटठा जनम मरण दा संसा मुक्का।

निस दिन तेरी महिमा गावां अवतार गुरु तों वारी जावां।"

धन निरंकार जी।।।। 

Saturday, 1 December 2012

"Avtaar Bani"

धन निरंकार जी।।।

"जिन्हा रब दा दर्शन कीता एह्नां दा सत्कार करो।

रब  बोले एह्नां दे अन्दर एह्नां नु नमस्कार करो।

नकल'च लुकया असल है जेह्ड़ा एहदे नाल प्यार करो।

जीवन नू समझो ते मन्नो ऐवें न ज़िद ख्वार करो।

जेह्ड़े रब नूं वेख के मनण जावां वारी ओहनां तो।

कहे अवतार जिन्हा रब डिटठा मैं  बलिहारी ओहना तो।"

धन निरंकार जी।।।

Friday, 30 November 2012

"Avtaar Bani"

धन निरंकार जी।।।।

"सूरज ते चन्न कीहदे हुक्म नाल चढ़दे ते डुब जांदे ने।

किहदे हुक्म नाल अम्बर उते तारे जगमगांदे ने।

कौण एह सानूं दाता बख्शे खावण अते हण्डावन लई।

किस ने कन्न ते मुंह हन दित्ते सुणन अते सुणावन लई।

जो वि आवे मुरशद पूरा एह परतख विखा देन्दै।

कहे अवतार इस बिछड़ी रूह नू सतगुरु रब मिला देन्दै।

धन निरंकार जी।।।।

 

Thursday, 29 November 2012

"Avtaar Bani"

धन निरंकार जी।।।

घर दे मालक भाझो हुन्दा जीकण सुन्ना डेरा है।

गुर दिस्से तां सिख  लई चानण न दिस्से तां न्हेरा है।

ज्यों प्यासे नु पानी बाझो गल्ल कोई होर सुखांदी नहीं।

ज्यों बिरला दे मारे ताई गल्ल किसे दी भान्दी नहीं।

 ज्यों फुल्लां ते देख बहारां बंद कलि मुस्कांदी है।

ज्यों सुहागन देख पति नू  दिल दिल विच हरशांदी है।

काले बद्दल वेख आकाशीं मोर ज्यों पैलां पान्दा  है।

अवतार तिवें सिख वेख गुरु नु फुल्या नहीं समांदा है।

धन निरंकार जी।।।
 

Tuesday, 27 November 2012

"Avtaar Bani.."

धन निरंकार जी।

" हर जर्रे विच सूरत तेरी हर पत्ते ते तेरा नाम।

ऐधर ओधर चार चुफेरे तेरी सूरत तकदा हां ।

चन्दन दे विच खुशबू तूं एं गंगा दे विच निर्मलता।

तूं ही तेज़ है सूरज अन्दर चन्दा दे विच शीतलता।

फुल्लां विच सुहप्पण तूं ए कलियां दे विच कोमलता। 

सुझां दे विच सोझी तूं एं तूं कला तूं कौशलता।

सतगुरु सच्चा बूटा तुहियों  दसवां द्वारा तेरा देस।

कहे अवतार  गुरु ने बख्शी अपणी बोली अपणा वेस।"

धन निरंकार जी।

 

Monday, 26 November 2012

"Avtaar Bani..:

धन निरंकार जी।

"आप ही अपणी जाणे दाता सभ नूं देंदा रहंदा ए।

एह गल अपणे  मुंह  तो लेकिन विरला ही कोई कहंदा ए।

ओही ओही मिलदा सभनूं जो जो वी एह कहंदा ए। 

मिलदा ए जो कह्न्दा ए जो कह्न्दा ए मिल रहंदा ए।

ज़ात इलाही कायम दायम भगत एहनूं निरंकार कहे।

एहो जाणे एहो समझे भाई रे अवतार कहे।

धन निरंकार जी।

Sunday, 25 November 2012

"Avtaar Bani.."

धन निरंकार जी।

"धोबी कपडे धोवण लगयां मैल कदे वी तकदा नहीं।

गुनाहगार नु बख्शन लगयां बख्शन्हारा थकदा नहीं।

सतगुरु पूरा कदे गुनाहां दे वल पान्दा झात नहीं।

सतगुरु दे लई छोटी वड्डी उच्ची नीवीं  जात नहीं।

सतगुरु देन्दा दात इलाही जो वी सीस झुकान्दा ए।

कहे अवतार ओह इक छिन अन्दर रमे राम नूं पान्दा ए।

धन निरंकार जी।